दिलीपा परेरा ने वर्ष 2011 में बैंकिंग क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की। वह और उनके पति दोनों नियमित नौकरी में थे। उनकी बेटी के जीवन के पहले तीन वर्षों में दिलीपा के माता-पिता उनकी बेटी की देखभाल करते थे। लंबे काम के घंटों के कारण दिलीपा अक्सर देर से घर लौटती थीं। ऐसे समय में उनकी बेटी बेचैन हो जाती थी और उसे शांत करने के लिए मोबाइल पर बच्चों के वीडियो दिखाए जाते थे।
दिलीपा अपने माता-पिता को दोष नहीं देतीं, क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी कोशिश की। लेकिन धीरे-धीरे दिलीपा को यह एहसास हुआ कि वह अपनी बेटी के बचपन के अनमोल पल खो रही हैं। उन्हें अपना बचपन याद आया, जब उनकी माँ हमेशा उनके साथ रहती थीं। तभी उन्होंने निश्चय किया कि वे अपनी बेटी के लिए भी वैसी ही माँ बनना चाहती हैं।
इस एहसास ने उन्हें एक बड़ा निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया — बेटी के साथ समय बिताना, अधिक वेतन से अधिक महत्वपूर्ण है।
बैंक की नौकरी करते हुए दिलीपा ने प्री-स्कूल शिक्षण का डिप्लोमा किया और शिक्षिका के रूप में प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2023 में उन्होंने विश्वास के साथ अपनी बैंक की नौकरी छोड़ दी। आय कम हो गई, लेकिन वे निराश नहीं हुईं। चार महीनों के भीतर उन्हें अपनी ही बेटी के स्कूल में प्राथमिक शिक्षिका के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिससे वे अपनी ही बेटी के साथ अधिक समय बिता सकीं।
दिलीपा ने विश्वास-आधारित पालन-पोषण को अपनाया। वे अपनी बेटी के साथ प्रार्थना करती हैं और बाइबल पढ़ती हैं। कठिन समय में यशायाह 54:13 का यह वचन उन्हें संबल देता है:
“तेरे सब पुत्र यहोवा से शिक्षा पाएंगे, और उन्हें बड़ी शांति मिलेगी।”
आज दिलीपा विश्वास, उपस्थिति और उद्देश्य के साथ अपनी बेटी का पालन-पोषण कर रही हैं।








