एलिज़र मुखिया एक ऐसे घर में बड़ा हुआ जहाँ हर दिन झगड़े, तनाव और डर का माहौल रहता था। उसके माता-पिता शराब पीते थे, और इसी कारण घर में अक्सर लड़ाई हो जाती थी। कई शामें चिल्लाहट और तनाव में बीतती थीं। घर में किसी तरह की शांति नहीं थी, और यह भारी वातावरण एलिज़र को भीतर तक प्रभावित करता था। वह घुटन महसूस करता था, चिंतित रहता था और भावनात्मक रूप से परेशान रहता था। रात में वह नींद में चलता था और तनाव के कारण असामान्य व्यवहार करता था।
जैसे-जैसे हालात बिगड़ते गए, उसका मन और ज़्यादा भारी हो गया। उसके विचार भारी होने लगे। वह खोया-खोया और भारी मन से जीता था, और कई बार सब कुछ छोड़कर भाग जाना चाहता था। वह भीतर की शांति चाहता था, लेकिन समझ नहीं पा रहा था कि वह कब और कैसे मिलेगी।
एक दिन एक पादरी उनके गाँव आए और यूहन्ना 3:16 का संदेश साझा किया। पहली बार एलिज़र ने सुना कि मसीह में एक ऐसी शांति मिलती है जो दिल को छूती है और मन को शांत करती है। उसके परिवार ने मसीह को स्वीकार किया, और धीरे-धीरे उनके घर में आशा लौटने लगी।
जब एलिज़र ने मसीह का अनुसरण करना शुरू किया, तो उसने अपने भीतर बदलाव महसूस किया। उसके मन का बोझ हल्का होने लगा। उसके विचार साफ होने लगे, और उसके अंदर दया और करुणा बढ़ने लगी। उसके माता-पिता के व्यवहार में सुधार आया, रिश्ते ठीक होने लगे, और घर का वातावरण शांत होने लगा। उसने 2 कुरिन्थियों 5:17 की प्रतिज्ञा को थामे रखा — कि जो मसीह में है, वह नया बनाया जाता है।
आज एलिज़र अपनी यात्रा दूसरों के साथ बाँटता है। उसकी कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर की शांति नए आरंभ, मन की स्थिरता और आशा दे सकती है।




